ईरान डील के बीच ट्रंप का बड़ा दांव: अब्राहम अकॉर्ड्स पर खाड़ी देशों को शामिल करने की शर्त

नई दिल्ली। ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय बातचीत के बीच अमेरिकी राजनीति में एक नया कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर एक बार फिर खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि किसी भी ईरान समझौते के साथ अब्राहम अकॉर्ड्स को जोड़ना जरूरी माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों को इस समझौते का हिस्सा बनकर इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब और कतर जैसे प्रमुख देशों को जल्द से जल्द इस पहल में शामिल होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
ट्रंप ने दावा किया कि अगर खाड़ी देश इस समझौते में शामिल होते हैं तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा और इससे क्षेत्र में आर्थिक व राजनीतिक स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने यहां तक कहा कि यदि ये देश अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर नहीं करते, तो अमेरिका को ईरान के साथ किसी भी समझौते पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। उनके इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
ट्रंप ने समझौते में पहले से शामिल देशों, खासकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), की सराहना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय सहयोग और व्यापारिक अवसरों में बढ़ोतरी हुई है।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स?
अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी, जिसका उद्देश्य इजराइल और कई अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य करना था। इस समझौते के तहत व्यापार, तकनीक, पर्यटन, चिकित्सा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन इस समझौते के तहत इजराइल के साथ संबंध स्थापित करने वाले पहले खाड़ी देश बने। इसके बाद मोरक्को और सूडान भी इस पहल में शामिल हुए।
यह समझौता मध्य पूर्व की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाता है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरणों को और प्रभावित कर सकता है।











